Nomadic Tribes – घुमक्कड़ जातियों का संघर्ष
भारत को आज़ादी मिले कितने साल हुए? 78 Years? आज भारत का जो रूप है उसे तैयार होने में कई दशक लगे हैं. हम आज विकासशील भारत से विकसित भारत की तरफ अपने कदम बढ़ा रहे हैं लेकिन अब भी आज 78 साल बाद भी हमारे भारतीय समाज में कई जातियां ऐसी हैं जो बिना किसी पहचान किसी नाम के जी रही है. ये लोग अभी तक समाज की मुख्धारा का हिस्सा नही बन पाए हैं. आप सोच रहे होंगे कौन हैं ये लोग? तो ये घुमक्कड़ जाति के लोग.
जब न धर्म था, न समाज था न संस्कृति थी तब भी ये समाज था और आज भी है, फर्क सिर्फ इतना है कि आज समाज संस्कृति शासन के इतना विकसित होने के बाद भी इस समाज के लोगों को उनकी पहचान उनकी जाति को उनका अस्तित्व अभी तक नहीं मिल पाया है. भारत में इन घुमक्कड़ जातियों की कुल आबादी 30 Cr के पास है. 30 कोरोड़. दिल्ली की जितनी जनसंख्या है लगभग उतने लोग इस जाति के हैं और इनमें से अधिकतर को अभी तक जाति प्रमाण पत्र जो आधार है भारत में किसी भी व्यक्ति को मिलने वाले आरक्षण या सरकारी योजनाओं के लाभ का वो तक भी है इनके पास.
सिर्फ पुणे जिला में Nomedic Tribes की जनसंख्या 40 Lakh है. इस समुदाय को अपनी पहचान दिलाने के लिए संजय सर पिछले 8 सालों से प्रयासरत हैं. इस विडियो में संजय सर ने मुझे इसी समुदाय के पुणे स्थित 4 जातियों के लोगों से मिलवाया और सर के अपने जीवन संघर्ष क्या रहे इनको इन्साफ दिलाने के दौरान उनकी भी हमने इस विडियो में चर्चा की है.
4 ऐसे समुदायों से हमने मुलाकात की जो हाशिये के समाज में भी हाशिये पर है जिनके पास आपने नाम और अपने मेहनत करने वाले दो हाथों के आलावा कुछ भी नहीं है. तो चलिए एक एक करके इनसे मिलते हैं.
पहले है घिसाड़ी समाज
2nd– वडर समाज- पत्थरों को तराशने का काम करते हैं
3rd– वागरी समाज
4th – जोशी समाज
कहने के लिए आप कह सकते हैं कि जाति प्रमाण पत्र की आवश्यता क्या है लेकिन ज़रूरत है. जब ये बन जायेगा तभी केंद्र या राज्य सरकार द्वारा चलाए जाने वाली सारी योजनाओं का लाभ इन्हें मिल पायेगा. मेरे पास जाति प्रमाण पत्र नहीं है तो मैं Genral Category में गिनी जाउंगी क्या कोई कह सकता है कि ये लोग Genral category में Count किये जाने लायक हैं?
सबसे बड़ा सवाल तो मीडिया पर खड़ा होता है. दिल्ली जितनी पापुलेशन की जनता का अभी तक जाति प्रमाण पत्र भी नहीं है और इन लोगों ने आजतक इसपर कोई खबर ही नहीं दिखाई. मैं और मेरा मित्र जिसने पूरी विडियो रिकॉर्ड की है वहां गए, वहां जाकर लोगों से मिले, उनकी समस्या समझी इसलिए लिए ये लोग इतने कृतग्य थे कि हमे हार पहना कर शुर्किया किया. ज़ाहिर सी बात है न कि जहाँ अभी तक main स्ट्रीम की मीडिया तक नहीं पहुची है वहा कोई छोटा youtube चैनल भी जायेगा और तो उनके लिए तो ये भी बड़ी बात है.
ये वीडियो बनाने का मुख्य उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोगों तक ये बात पहुचे कि ऐसा भी एक समाज है जिसे अभी तक इंसाफ नहीं मिला है और सब जब मिलकर इनके लिए आवाज़ उठाएंगे तो उम्मीद जागेगी की जल्द ही सरकार का ध्यान भी इस समुदाय की तरफ जाएगा.

